सुरख़ाब का राज़ | एक दिलचस्प और सबक़-आमोज़ क़िस्सा

सुरख़ाब का राज़ - बादशाह बुलंद-बख़्त के बाग़ में उड़ता सुरख़ाब का जोड़ा।

सुरख़ाब का राज़ एक ऐसे बादशाह का है, जो अपनी ही बेटी की अक़्लमंदी से ख़ौफ़ खाने लगा था। एक दिन बाग़ के तालाब पर उतरने वाले सुरख़ाब के एक जोड़े की आवाज़ों ने बादशाह को इतना नाराज़ कर दिया कि उसने अपने वज़ीर को चौबीस घंटे के अंदर उनका राज़ जानने का हुक्म दे दिया। मगर उसे क्या मालूम था कि इस छोटे-से वाक़िआ के पीछे उसकी अपनी क़िस्मत का फ़ैसला छिपा हुआ है।